सहरसा :– शिव कुमार (संवाददाता) श्री कारू खिरहरी से जुड़े धार्मिक न्यास में न्यासधारी की नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच न्यासधारी निरंजन कुमार ने अपनी नियुक्ति के संबंध में अपना पक्ष रखा है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी नियुक्ति पारिवारिक वंश परंपरा, वसीयतनामा और उत्तराधिकारी संबंधी दस्तावेजों के आधार पर हुई है।
निरंजन कुमार के अनुसार, श्री कारू खिरहरी उनके पूर्वज थे। उन्होंने बताया कि कारू खिरहरी का वंश आगे नहीं चलने के बाद उनकी संपत्ति और पारिवारिक उत्तराधिकार उनके छोटे भाई लक्षण खिरहरी को प्राप्त हुआ। उनका कहना है कि वर्तमान में उनका परिवार लक्षण खिरहरी के वंशजों में शामिल है।
उन्होंने बताया कि लक्षण खिरहरी के दो पुत्र निर्मल खिरहरी और झामन खिरहरी थे। निरंजन कुमार के अनुसार, 5 मार्च 1889 को निर्मल खिरहरी द्वारा लिखे गए मूल वसीयतनामा में निर्मल खिरहरी एवं झामन खिरहरी के खानदान से महंत एवं प्रबंधक नियुक्त किए जाने की परंपरा का उल्लेख है।
निरंजन कुमार ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि 5 मार्च 1889 को निर्मल खिरहरी ने बोलत खिरहरी को, 1 जनवरी 1902 को बोलत खिरहरी ने बीरू खिरहरी को, 11 मई 1931 को बीरू खिरहरी ने मुसो खिरहरी को तथा 16 नवंबर 1940 को मुसो खिरहरी ने बुची खिरहरी और गेजा खिरहरी को संयुक्त रूप से उत्तराधिकारी/प्रबंधक बनाया।
उन्होंने आगे बताया कि 16 मार्च 1974 को बुची खिरहरी एवं गेना खिरहरी ने तारणी खिरहरी को उत्तराधिकारी बनाया। इसके बाद 3 जून 2024 को तारणी खिरहरी द्वारा निरंजन कुमार को उत्तराधिकारी एवं प्रबंधक नियुक्त किए जाने की बात कही गई है।
न्यासधारी का दावा है कि वर्ष 1889 से चली आ रही लिखित वंश परंपरा, वसीयतनामा और उत्तराधिकारी संबंधी दस्तावेजों के आधार पर ही वर्तमान नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी। उन्होंने कहा कि इन्हीं दस्तावेजों को आधार बनाकर धार्मिक न्यास परिषद द्वारा उनकी नियुक्ति की गई है।
निरंजन कुमार ने कहा कि नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज और वंश परंपरा का रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर सभी संबंधित दस्तावेज सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
हालांकि, नियुक्ति को लेकर उठाए जा रहे सवालों और दावों पर संबंधित अन्य पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
